Aravali Range | अरावली पर्वतमाला का महत्व, इतिहास और कोर्ट के आदेश
अरावली पर्वतमाला: भारत की प्राचीन और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण पहाड़ियाँ
1. अदालतों के निर्णय (Court Orders) और कानूनी स्थिति
मुख्य न्यायालय (Supreme Court) के दिशा-निर्देश
हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों के लिए एक मानकीकृत परिभाषा तय की ताकि खनन नियंत्रण और संरक्षण को अधिक स्पष्ट बनाया जा सके।
इस निर्णय के प्रमुख बिंदु:
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अरावली हिल (Hill): वह भूमि जो आसपास की सतह से 100 मीटर या उससे अधिक ऊँची हो।
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अरावली रेंज (Range): ऐसी दो या अधिक पहाड़ियाँ जो एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर स्थित हों।
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खनन पर रोक: सुप्रीम कोर्ट की ओर से नई खनन लीज़ (leases) और नवीनीकरण पर रोक लगाई गई जब तक एक व्यापक प्रबंधन योजना नहीं बना दी जाती।
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निगरानी: आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन और निगरानी कैमरों से अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण।
विवाद और न्यायालय का स्थगन
– इसके बाद पर्यावरण समूहों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने इस नई परिभाषा को लेकर विरोध जताया, यह कहते हुए कि इससे कई क्षेत्रों की कानूनी सुरक्षा कम हो सकती है।
– इसी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने 100-मीटर परिभाषा निर्णय को अस्थायी रूप से स्थगित (stay) भी किया।
अतिरिक्त न्यायिक हस्तक्षेप
– पिछले दशकों में सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई बार अवैध खनन, वन भूमि अतिक्रमण और संरक्षित जोन में निर्माण के खिलाफ कदम उठाए हैं।
2. अरावली क्या है? (What is Aravalli?)
अरावली पर्वतमाला भारत के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में फैली एक प्राचीन पर्वत श्रृंखला है। यह लगभग 670 किलोमीटर लंबी है और गुजरात से दिल्ली तक फैली हुई है — राजस्थान और हरियाणा से होते हुए।
यह पृथ्वी पर मौजूद सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसकी उत्पत्ति लगभग 2 अरब वर्ष पहले हुई थी (हिमालयों की तुलना में कहीं पुरानी)।
सबसे ऊँचा बिंदु: गुरु शिखर (माउंट आबू), लगभग 1,722 मीटर।
3. पर्यावरणीय और भौगोलिक महत्व
प्राकृतिक भूमिका:
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भूजल (Groundwater) का प्रमुख स्रोत: बारिश का पानी अरावली की दरारों में गहराई से रिसकर भूमिगत (aquifers) में जाता है, जिससे आसपास के शहरों में पानी की आपूर्ति बनी रहती है।
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मरुस्थलीकरण (Desertification) रोकना: थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकती है।
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जलवायु नियंत्रण: वायु गुणवत्ता को बेहतर रखने, तापमान संतुलन और मौसमी प्रबंधन में सहायक।
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वन्यजीव और जैव विविधता: यह कई प्रजातियों का निवास स्थान है और महत्वपूर्ण वन्यजीव मार्ग को बनाए रखती है।
नदियाँ: बानास, लूनी, सखी और साबरमती जैसी नदियाँ अरावली से निकलती हैं।
4. आर्थिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता
आयोजन और उद्योग:
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अरावली में खनिज संसाधन जैसे क्वार्ट्जाइट, चूना पत्थर (limestone), संगमरमर आदि पाए जाते हैं, जिसके कारण यहाँ खनन (mining) हुआ है।
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बड़े शहरों के निकट होने के कारण औद्योगिक और शहरी दबाव भी अधिक है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल:
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अरावली क्षेत्र में मशहूर ऐतिहासिक किले (जैसे चित्तौड़गढ, कुम्भलगढ़) और धार्मिक स्थान (जैसे पुष्कर, अजमेर) स्थित हैं।
5. पर्यावरणीय संकट (Current Threats)
अरावली की экологिक भूमिका के बावजूद पिछले दशकों में:
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खनन और पत्थर खदानों की संख्या बढ़ी,
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कई क्षेत्रों में वनों की कटाई, शहरी विस्तार, निर्माण कार्य हुए,
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छोटे-छोटे पहाड़ियों और टीलों का विनाश भी जारी है।
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यदि संरक्षण में देरी होती है, तो अरावली का कई हिस्सों में नुकसान और खतरा बढ़ सकता है।
6. संरक्षण और भविष्य
सरकार और राज्य सरकारें अरावली के संरक्षण के लिए विभिन्न प्रयास कर रही हैं जैसे हरियाणा का Aravali Green Wall Project — जिसका लक्ष्य 2030 तक इकोलॉजिकल संरक्षण और भूमि क्षरण को रोकना है।
समर्थक सुझाव:
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पारिस्थितिक संरक्षण के लिए अंतर-राज्यीय सहयोग,
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मजबूत कानूनी फ्रेमवर्क,
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स्थानीय समुदायों की भागीदारी और
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वैज्ञानिक पर्यवेक्षण आवश्यक हैं।
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